कनोल में नंदामय हुआ पहाड़, देव डोलियों और हजारों श्रद्धालुओं का जमावड़ा

-सैकड़ों छंतोलियों-निशाणों के साथ पहुंचीं देव डोलियां

-झोड़ा-चांचरी और जयकारों से गूंजता रहा नंदाक का अंतिम गांव

गोपेश्वर (चमोली)। नंदाक के अंतिम गांव कनोल में मंगलवार को आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा गांव नंदामय हो उठा। मां नंदा की बड़ी जात में शामिल देव डोलियों, निशाणों, सैकड़ों छंतोलियों और हजारों श्रद्धालुओं ने कनोल में प्रवास किया। दो दिन की बारिश के बाद मौसम खुलने से श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली और सुबह से ही कनोल की ओर नंदाभक्तों का रेला उमड़ता रहा।

कनोल में कुरुड़-दशोली की नंदा डोली, बंड की नंदा डोली, ल्वाणी की ज्वाल्पा देवी की डोली, बंड भूमियाल की छंतोली और गेदाणु देवता की छंतोली समेत विभिन्न देव डोलियों की ग्रामीणों ने विधिवत पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने देव डोलियों को समौंण भेंट कर अपने घर-परिवार और गांव की सुख-समृद्धि की कामना की। देवताओं ने अस्त्र-शस्त्रों और कटार भेदों के प्रदर्शन से अपनी परंपरागत वीरता का परिचय भी दिया।

दिनभर कनोल में लोक संस्कृति की छटा बिखरी रही। पारंपरिक परिधानों में सजे ग्रामीणों ने झोड़ा और चांचरी नृत्य किया। मां नंदा के लोकगीतों, जागरों और जयकारों से पूरा गांव गूंजता रहा। सैकड़ों छंतोलियों और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने बड़ी जात को भव्य और दिव्य स्वरूप दे दिया।

बंड परगने से बड़ी जात में शामिल होने कनोल पहुंचे शंभू प्रसाद सती ने बताया कि वह 1987, 2000 और 2014 की बड़ी जात के साथ नंदा राजजात में भी शामिल हो चुके हैं, लेकिन इस बार जैसी आस्था और श्रद्धा का हुजूम उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना मां नंदा की कृपा है। उनके अनुसार बिना किसी सरकारी सहायता के ग्रामीण जिस सेवा भाव से बड़ी जात की व्यवस्था संभाल रहे हैं, वह अपने आप में मिसाल है।

नंदाभक्तों के लिए ग्रामीणों ने खोल दिए घरों के दरवाजे

सुदूर सीमांत गांव कनोल में पिछले दो दिनों से नंदाभक्तों का पहुंचना लगातार जारी था। सोमवार रात से मंगलवार तक हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ। ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, पानी और ठहरने की व्यवस्था की। यहां तक कि लोगों ने अपने घरों के दरवाजे भी नंदाभक्तों के लिए खोल दिए।

दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु कनोल के ग्रामीणों के आतिथ्य-सत्कार से अभिभूत नजर आए। बड़ी जात में शामिल लोगों ने कहा कि कनोल जैसे सुदूर गांव में जिस आत्मीयता और सेवा भाव से श्रद्धालुओं की मेजबानी की जा रही है, वह मां नंदा की यात्रा की मूल भावना को जीवंत कर रही है।

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