- निविदा प्रक्रिया में पोर्टलों ने खुद प्रस्तुत किए एल-1 और एल-2 रेट, असहमति होने पर लिखित आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प
देहरादून। न्यूज़ पोर्टलों की सूचीबद्धता को लेकर सूचना विभाग की निविदा प्रक्रिया पर कुछ लोगों द्वारा सवाल उठाया जा रहा हैं लेकिन वह यह भूल जा रहे हैं कि निविदा में एल-1 और एल-2 के रूप में प्राप्त दरें सूचना विभाग द्वारा निर्धारित नहीं की गई हैं, बल्कि संबंधित न्यूज़ पोर्टलों ने निविदा प्रक्रिया के तहत अपनी दरें स्वयं प्रस्तुत की हैं। ऐसे में निविदा में किसी पोर्टल द्वारा प्रस्तुत दर को बाद में विभाग की ओर से निर्धारित दर बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
टेंडर में पोर्टलों ने खुद दी अपनी दरें
न्यूज़ पोर्टलों की सूचीबद्धता के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत टेंडर जारी किया गया था। इसके बाद संबंधित पोर्टलों को अपनी दरें प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। प्राप्त दरों के आधार पर ही एल-1, एल-2 आदि का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में कम दर प्राप्त होने पर सीधे सूचना विभाग को जिम्मेदार ठहराने के बजाय यह देखना जरूरी है कि संबंधित दर स्वयं पोर्टल द्वारा निविदा में प्रस्तुत की गई थी।
असहमति है तो लिखित आपत्ति दर्ज कराएं
निविदा में प्राप्त दरों को लेकर किसी पोर्टल संचालक को असहमति है अथवा उसे लगता है कि निर्धारित दर अपेक्षाकृत कम है तो वह विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करा सकता है। संबंधित पोर्टल संचालक अपनी बात और सुझाव विभाग के सामने रख सकते हैं। प्राप्त आपत्तियों और लागू नियमों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।
कम दर के आधार पर पूरी प्रक्रिया रद्द नहीं हो सकती
केवल इस आधार पर कि कुछ पोर्टलों की दरें अपेक्षाकृत कम प्राप्त हुई हैं, पूरी निविदा प्रक्रिया को स्वतः निरस्त नहीं किया जा सकता। नियमानुसार निविदा प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्राप्त दरों का परीक्षण किया जाता है और नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाती है।
दरें पोर्टलों ने स्वयं की निर्धारित
न्यूज़ पोर्टलों की सूचीबद्धता के लिए जारी निविदा में एल-1 और एल-2 दरें सूचना विभाग की ओर से निर्धारित नहीं की गई हैं। संबंधित पोर्टलों ने निविदा प्रक्रिया के तहत अपनी दरें स्वयं प्रस्तुत की हैं। ऐसे में प्राप्त दरों को विभाग द्वारा तय की गई दर के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
असहमति होने पर दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
यदि किसी पोर्टल संचालक को निविदा में प्राप्त दरें कम लगती हैं या वह प्रस्तावित दरों से सहमत नहीं है तो वह अपनी आपत्ति अथवा असहमति विभाग के समक्ष लिखित रूप में दर्ज करा सकता है। प्राप्त आपत्तियों और निर्धारित नियमों के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता निकाला जा सकता है।
बैनरों की संख्या बढ़ने से बेहतर हो सकती है विज्ञापन दर
मामले में यह संभावना भी जताई जा रही है कि यदि बैनरों की संख्या बढ़ाई जाती है तो विज्ञापन की दरों में भी सुधार किया जा सकता है। ऐसे में पोर्टल संचालकों की व्यावहारिक समस्याओं को सामने रखकर विभाग के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशा जा सकता है।
सोशल मीडिया के बजाय सीधे संवाद की जरूरत
पोर्टल संचालकों और पत्रकारों के लिए बेहतर होगा कि वे सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के बजाय डीजी सूचना बंशीधर तिवारी से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्याएं और सुझाव उनके सामने रखें। बंशीधर तिवारी पत्रकारों के हितों की सदैव रक्षा करते आए हैं और पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक रुख रखते हैं। ऐसे में बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालकर सभी पक्षों के हित में समाधान तलाशा जा सकता है।
अंतिम सूचीबद्धता से पहले समाधान की संभावना
चूंकि निविदा प्रक्रिया अभी पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले चुकी है, इसलिए संबंधित पोर्टलों के पास अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने का अवसर मौजूद है। नियमों के दायरे में रहते हुए यदि सभी पक्ष आपसी संवाद से आगे बढ़ें तो पोर्टलों की व्यावहारिक चिंताओं का समाधान निकाला जा सकता है और सूचीबद्धता की प्रक्रिया को भी पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

