एकेश्वर बीडीसी बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर भड़के कवींद्र इष्टवाल, जनप्रतिनिधियों ने भी जताई नाराजगी

एकेश्वर। विकासखंड मुख्यालय एकेश्वर में आयोजित क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) की बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के अलावा कोई भी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और बैठक की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए।

बैठक में जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र इष्टवाल ने क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सड़क, पेयजल और विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं पर प्रशासन को घेरते हुए कहा कि यदि बैठकों में समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे तो ऐसे आयोजनों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

कवींद्र इष्टवाल ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से सड़क और पानी की गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन इनके समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिला स्तर के अधिकारी बैठक में भाग ही नहीं लेते तो जनता की समस्याओं का निराकरण कैसे संभव होगा।

बैठक के दौरान एक अन्य मुद्दे पर भी विवाद खड़ा हो गया। इष्टवाल ने आरोप लगाया कि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) की ओर से उन्हें यह कहा गया कि जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि को बैठक में शामिल होने का अधिकार नहीं है। इस पर उन्होंने कड़ा विरोध जताया। मामले में सीडीओ ने स्पष्ट किया कि जिला पंचायत सदस्य का अधिकृत प्रतिनिधि बैठक में शामिल हो सकता है और बीडीओ की ओर से दी गई जानकारी गलत थी।

इस पर इष्टवाल ने सीडीओ से मांग की कि संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है और प्रशासनिक अधिकारियों को नियमों की सही जानकारी होनी चाहिए।

बैठक में मौजूद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रतिनिधि को भी इष्टवाल ने आड़े हाथों लिया और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं में कथित खामियों को उजागर करते हुए कहा कि कई गांवों में आज भी लोगों को नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

जनसमस्याओं के समाधान में प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाते हुए कवींद्र इष्टवाल ने बैठक के दौरान जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर के अधिकारी पहले से ही क्षेत्र की समस्याओं से अवगत हैं, लेकिन बड़ी और जटिल समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर ही संभव है। ऐसे में जिला स्तरीय अधिकारियों की अनुपस्थिति जनप्रतिनिधियों और आम जनता के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायत बैठकों का उद्देश्य विकास कार्यों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना होता है। यदि जिम्मेदार अधिकारी इन बैठकों को गंभीरता से नहीं लेंगे तो इनका उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इष्टवाल ने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में सभी संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी बीडीसी बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

बैठक के दौरान कई जनप्रतिनिधियों ने भी अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि विकास योजनाओं की समीक्षा और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी आवश्यक है।

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